आज का राहुकाल समय
📅 गुरुवार, 4 जून 2026
🕐 राहुकाल: 2:05 PM से 3:50 PM तक
📝 राहुकाल को पारंपरिक रूप से नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए कम उपयुक्त समय माना जाता है।
ये समय उत्तर भारत (दिल्ली region) के coordinates पर based है। आपके शहर में 5-15 मिनट का अंतर हो सकता है — ये सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है।
राहुकाल क्या होता है?
राहुकाल को समझने के लिए पहले राहु ग्रह को समझना ज़रूरी है। Vedic astrology में राहु एक छाया ग्रह (shadow planet) माना जाता है। ये physically exist नहीं करता — ये चंद्रमा की कक्षा और पृथ्वी की कक्षा के intersection point का mathematical representation है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, राहु का प्रभाव uncertainty और अस्थिरता लाता है। इसलिए हर दिन जो समय-खंड राहु के प्रभाव में आता है, उसमें नया शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
राहुकाल की गणना कैसे होती है?
ये calculation बहुत systematic है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। हर भाग करीब 90 मिनट (डेढ़ घंटा) का होता है।
अब सवाल ये है — 8 भागों में से कौन सा राहुकाल होगा? ये वार (day) पर निर्भर करता है:
- सोमवार — दूसरा भाग (सुबह 7:30 – 9:00 बजे approximately)
- मंगलवार — सातवाँ भाग (दोपहर 3:00 – 4:30 बजे approximately)
- बुधवार — पाँचवाँ भाग (दोपहर 12:00 – 1:30 बजे approximately)
- गुरुवार — छठा भाग (दोपहर 1:30 – 3:00 बजे approximately)
- शुक्रवार — चौथा भाग (सुबह 10:30 – 12:00 बजे approximately)
- शनिवार — तीसरा भाग (सुबह 9:00 – 10:30 बजे approximately)
- रविवार — आठवाँ भाग (शाम 4:30 – 6:00 बजे approximately)
ऊपर दिए गए समय approximate हैं। असली समय सूर्योदय-सूर्यास्त के हिसाब से बदलता है। गर्मियों में दिन लंबा होने पर राहुकाल का duration बढ़ जाता है, सर्दियों में कम हो जाता है।
याद रखने का आसान formula
एक popular mnemonic है: "मा रा बु गु शु श र" — यानी 2-7-5-6-4-3-8। सोमवार को दूसरा भाग, मंगलवार को सातवाँ... इसी तरह।
राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, राहुकाल में ये कार्य टालने चाहिए:
- नया व्यापार शुरू करना
- नई नौकरी join करना
- शुभ कार्य — विवाह, सगाई, गृह प्रवेश
- नया loan लेना या बड़ा investment करना
- महत्वपूर्ण agreement sign करना
- नई यात्रा शुरू करना
ध्यान दें — ये traditional guidelines हैं। इनका कोई scientific proof नहीं है। कई लोग इन्हें follow करते हैं, कई नहीं करते।
राहुकाल में क्या किया जा सकता है?
कुछ काम हैं जो राहुकाल में भी ठीक माने जाते हैं:
- पहले से शुरू किया हुआ काम जारी रखना
- Routine daily work — office जाना, पढ़ाई करना
- Emergency situations में कोई भी ज़रूरी काम
- दुर्गा माता या राहु देवता की पूजा (कुछ लोग ऐसा करते हैं)
एक बात साफ़ कर दूँ — अगर doctor's appointment है, emergency है, या कोई ज़रूरी काम है तो राहुकाल की चिंता मत करें। व्यावहारिकता हमेशा पहले आती है।
राहुकाल और गुलिक काल में अंतर
बहुत से लोग confuse होते हैं — राहुकाल, गुलिक काल, और यमघंटक काल तीनों अलग-अलग हैं।
राहुकाल — राहु ग्रह के प्रभाव वाला समय। सबसे ज़्यादा follow किया जाता है।
गुलिक काल — शनि ग्रह के पुत्र गुलिक (मांदी) के प्रभाव का समय। कुछ लोग इसे भी check करते हैं।
यमघंटक — यम (मृत्यु के देवता) से related काल। South India में ज़्यादा follow होता है।
अगर आप basic level पर follow करना चाहते हैं, तो सिर्फ राहुकाल देखना sufficient है।
क्या राहुकाल scientifically valid है?
ईमानदार जवाब — नहीं। Modern science इसे recognize नहीं करती। राहु एक mathematical point है, physical planet नहीं। उसका gravitational या electromagnetic effect measurable नहीं है।
लेकिन ये भी सच है कि भारत में करोड़ों लोग इसे follow करते हैं। ये एक cultural practice है जो सदियों पुरानी है। हम इसे न तो promote करते हैं, न reject — बस information provide करते हैं।
व्यावहारिक सुझाव
अगर आप राहुकाल follow करते हैं, तो कुछ practical tips:
- सुबह उठकर आज का राहुकाल check करें — daily routine में 30 seconds लगते हैं
- Important meetings या interviews schedule करते समय ध्यान रखें
- अगर राहुकाल में ही कोई काम करना पड़े, तो परेशान न हों — सिर्फ avoid करें, obsess न करें
- राहुकाल के अलावा चौघड़िया भी देखें — दोनों मिलाकर better picture मिलती है
संबंधित जानकारी
👉 आज का चौघड़िया — शुभ-अशुभ समय का विस्तृत chart
👉 आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण
👉 शुभ मुहूर्त — विवाह और गृह प्रवेश के लिए
👉 नवग्रह — सभी 9 ग्रहों की जानकारी